अगहन मास या मार्गशीर्ष पूर्णिमा का उपवास रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्र दोष है चंद्र राहु या केतु अथवा शनि से पीड़ित है, चंद्रमा क्षीण हो या नीचस्थ हो ऐसे जातक पूर्णिमा का उपवास रखें जिससे कि कुंडली में विराजमान चंद्र दोष दूर होते हैं।

मार्गशीर्ष माह में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है पूर्णिमा पर सत्यनारायण की कथा सुनने व पढ़ने से भगवान श्री कृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन दंपतियों को संतान उत्पत्ति में बाधा आ रही हो उन्हें पूर्णिमा का उपवास रखने से संतति प्राप्त होती है। जिन जातकों का विवाह में विलंब हो रहा हो उन्हें भी पूर्णिमा का उपवास रखना चाहिए क्योंकि चंद्रमा प्रेम का कारक ग्रह भी है।

मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 18 दिसंबर प्रातः 7:26 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी 19 दिसंबर प्रातः 10:07 मिनट पर।

पूजा विधि

  • प्रातः नित्यकर्म से निवृत हो, स्नानादि के उपरांत संपूर्ण घर व मंदिर को स्वच्छ करें मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें व्रत का संकल्प लें।
  • रोली, कुमकुम, अक्षत, पीले पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, पंचामृत भगवान को अर्पित करें।
  • अखंड ज्योत प्रज्वलित करें। सत्यनारायण की कथा का पाठ करें।
  • घी के दीपक से आरती करें।
  • चंद्रोदय होने के उपरांत चंद्र देव की पूजा अर्चना करें स्टील या चांदी के बर्तन से जल अर्पित करें।
  • खीर का भोग लगाएं।
  • किसी जरूरतमंद को सफेद वस्तुओं (सफेद वस्त्र, दूध, दही, चावल, सफेद पुष्प, चांदी, मोती) का दान करें।