भगवान भैरव के 8 रूपों की कथा

भगवान भैरव के 8 रूपों की कथा

भगवान शिव का ही एक रूप भगवान भैरव को मान जाता है । भगवान भैरव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान भैरव को कई रूपों में पूजा जाता है। भगवान भैरव के मुख्य 8 रूप माने जाते हैं। उन रूपों की पूजा करने से भगवान अपने सभी भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें...

नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा के नौ स्वरूप और उनकी कथा

नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा के नौ स्वरूप और उनकी कथा

नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा माता के विभिन्न नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। जिन नौ रूपों की पूजा की जाती है उसे नवदुर्गा कहा जाता है। नवदुर्गा के नौ रूप जिसे चैत्र माह और अश्विन माह के प्रतिपदा से नवमी तक पूजा जाता है वो क्रमशः निम्नलिखित हैं। शैलपुत्री...

शादी के सात फेरों और सात फेरों में लिए गए वचन का क्या है प्रयोजन

शादी के सात फेरों और सात फेरों में लिए गए वचन का क्या है प्रयोजन

सनातन संस्कृति में मनुष्य पूर्ण तभी होता है जब उसका विवाह संस्कार होता है। हमारे यहाँ विवाह कोई कार्यक्रम नही एक संस्कार है। गृहस्थ आश्रम की शुरुआत इसी संस्कार के पश्चात होती है। विवाह से पूर्व स्त्री या पुरुष को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया...

मंगलवार व्रत कथा, पूजन विधि और आरती

मंगलवार व्रत कथा, पूजन विधि और आरती

धन-सम्पत्ति, यश, वैभव और संतान प्राप्ति के लिए प्रत्येक मंगलवार को पूरी दिन व्रत रख कर मंगलवार का व्रत कथा सुनना शुभ माना जाता है। अतः मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्ति को मंगलवार व्रत कथा का श्रवण पूरी श्रद्धा से करना चाहिए। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और सभी...

सोमवार व्रत कथा और व्रत विधि | इस पवित्र व्रत से, भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है

सोमवार व्रत कथा और व्रत विधि | इस पवित्र व्रत से, भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है

अगर कोई भी व्यक्ति शिव शंकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सोमवार का व्रत करता है, तो श्रद्धा भाव से सोमवार का व्रत कथा का श्रवण निश्चित रूप से करना चाहिए। शिव बहुत भोले हैं तभी इनका नाम भोलेनाथ है। शिव आराधना अगर सच्ची श्रद्धा से किया जाय तो ये शीघ्र प्रसन्न हो जाते...

गौ माता का शास्त्र पुराणों में माहात्मय

गौ माता का शास्त्र पुराणों में माहात्मय

वृषभो को जगत् का पिता समझना चाहिये और गौएं संसार की माता हैं। उनकी पूजा करने से सम्पूर्ण पितरों और देवताओं की पूजा हो जाती है। जिनके गोबरसे लीपने पर सभा भवन, पौंसलेे, घर और देवमंदिर भी शुध्द हो जाते हैं, उन गौओ से बढकर और कौन प्राणी हो सकता है? जो मनुष्य एक साल तक...

चरण स्पर्श से लेकर मांग में सिन्दूर भरने तक का यह चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण

चरण स्पर्श से लेकर मांग में सिन्दूर भरने तक का यह चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण

रीति-रिवाज और परंपराएं हर किसी की व्यक्तिगत आस्था का सवाल होती हैं। हिंदू धर्म में बहुत सी ऐसे रीति-रिवाज हैं जिनके वैज्ञानिक आधार हैं। हाथ जोड़कर नमस्कार करना हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा और सभ्यता है। नमस्कार करने का वैज्ञानिक कारण दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार करने...

भगवान शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए यह रूप धारण किया

भगवान शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए यह रूप धारण किया

यह कथा उस समय कि है जब भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्ति के लिए देवी पार्वती जंगल में घोर तपस्या में लीन थी। उनकी ऐसी तपस्या देख कर समस्त देवगण शिव जी से प्रार्थना कर रहे थे कि हे देवाधिदेव पार्वती की मनोकामना पूरा करें। भगवन शिव ने सप्तर्षियों को देवी पार्वती की...

देवशयनी एकादशी व्रत विधि, कथा और महत्व

देवशयनी एकादशी व्रत विधि, कथा और महत्व

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी तिथि को देवशायनी या हरिशायनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार सारे व्रतों में एकादशी व्रत का एक विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक विश्राम के लिए चले...

प्रदोष व्रत की कथा, पूजा की विधि और इसका महत्व क्या है?

प्रदोष व्रत की कथा, पूजा की विधि और इसका महत्व क्या है?

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई पूजा विधान और व्रत करते है जैसे की कांवड़ यात्रा, अमरनाथ यात्रा, सावन के व्रत, भगवान शिव के लिए सोमवार के व्रत या फिर शिवलिंग पर जल चढ़ाना इत्यादि। अगर देखा जाये तोह भगवान शिव को प्रदोष के व्रत अत्यधिक प्रिय है, इन व्रत के माध्यम...