मंगलवार व्रत कथा, पूजन विधि और आरती

धन-सम्पत्ति, यश, वैभव और संतान प्राप्ति के लिए प्रत्येक मंगलवार को पूरी दिन व्रत रख कर मंगलवार का व्रत कथा सुनना शुभ माना जाता है। अतः मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्ति को मंगलवार व्रत कथा का श्रवण पूरी श्रद्धा से करना चाहिए। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनायें पूरी करते हैं। हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो हर युग में विद्यमान रहते हैं। रामायण काल और महाभारत काल में तो वो विद्यमान थे ही परन्तु ऐसा कहा जाता है की वो कलयुग में भी विद्यमान हैं। हनुमान जी को भगवान शिव का रूप माना गया है। ये बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

मंगलवार पूजन विधि (Mangalvar Vrat Vidhi in Hindi)

मंगलवार व्रत की शुरूआत शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से करनी चाहिए. इस व्रत को आठ मंगलवार अवश्य करें. इस व्रत में गेहूं और गुड़ से बना भोजन ही करना चाहिए. एक ही बार भोजन करें. लाल पुष्प चढ़ायें और लाल ही वस्त्र धारण करें. अंत में हनुमान जी की पूजा करें.

मंगलवार व्रत कथा (Mangalvar Vrat Katha in Hindi)

बहुत पुरानी बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण अपने पत्नी के साथ रहते थे। वे निःसंतान होन कारण वह बहुत दुखी थे। ब्राह्मण जंगल में बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने चला गया। वह हनुमान जी को प्रसन्न कर पुत्र की प्राप्ति करना चाहता था। इधर ब्राह्मणी भी पुत्र की प्राप्ति की कामना से प्रत्येक मंगलवार को व्रत करती थी। वह मंगलवार के दिन व्रत के समाप्ति पर जो भी भोजन होता था वो पहले हनुमान जी को भोग लगाती थी फिर खुद भोजन करती थी।

एक दिन व्रत के बाद ब्राह्मणी भोजन नहीं बना पायी और बजरंगबली को भी भोग नहीं लगा सकी। उस दिन उसने प्रण लिया कि जब तक मैं अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग नहीं लगाउंगी तब तक भोजन और जल ग्रहण नहीं करुंगी। वह पुरे सप्ताह भूखी प्यासी रही। मंगलवार के दिन वह कमजोरी से बेहोश हो कर गिर गई। उसकी अपार श्रद्धा और भक्ति देखकर हनुमान जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ब्राह्मणी को एक बहुत सुन्दर पुत्र दिया और बोला कि यह पुत्र तुम्हारी बहुत देखभाल करेगा। यह कह कर हनुमान जी चले गए।

ब्राह्मणी अपने बालक के साथ बहुत खुश रहने लगी। उसने उसका नाम ही मंगल रख दिया। कुछ समय गुजरने के बाद जब ब्राह्मण घर लौटा, तो घर में एक बालक को देख कर जानना चाहा कि वह कौन है? ब्राह्मणी बतायी कि मंगलवार व्रत से खुश होकर बजरंगवली यह बालक दिया है। परन्तु ब्राह्मण को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। अगले दिन मौका पाकर ब्राह्मण ने चुपके से बालक को एक कुएं में फेंक दिया।

घर लौटने पर जब पत्नी पूछी – मंगल कहां है? इतने में पीछे से मुस्कुराता हुआ मंगल आ गया। ये देखकर ब्राह्मण आश्चर्य चकित हो गया। रात को जब ब्रह्मण सो रहा था तो बजरंगवली उसके सपने में आये बोले जिसे तुम फेक रहे थे उसे मैं ने ही उसे दिया है। सत्य जानने के बाद ब्राह्मण की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा। इस दिन के बाद दोनों पति पत्नी प्रत्येक मंगलवार नियमित रूप से पूरी श्रद्धा के साथ व्रत करने लगे। मंगलवार का व्रत जो भी प्राणी रखता है उस पर बजरंगवली की कृपा हमेशा बनी रहती है।

मंगलवार व्रत की आरती (Mangalwal Vrat Aarti)

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनीपुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीड़ा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंक सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। लाय संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएँ भुजा असुर संहारे। दाहिने भुजा संत जन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जै जै जै हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥

बालकृष्ण शास्त्री

बालकृष्ण शास्त्री जी ने धर्मनगरी हरिद्वार में अध्यात्म का अध्ययन करते हुए, समाज सेवा को अपना ध्येय बनाया। बालकृष्ण जी "कुम्भ दर्शनम" मासिक पत्रिका प्रकाशित करते है, और वे एक वरिष्ठ पत्रकार है। शास्त्री जी अपने अध्ययन और अनुभवों को अपनी लेखनी के माध्यम से पाठको तक पहुंचाते है।

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